🚩15 अगस्त 1987 को स्कूल की यादें🚩
भाइयों 15 अगस्त 1987 में जू हाई स्कूल डबरा में हम कक्षा आठ में पढते थे उस समय हमारे स्कूल में देशभक्ति पर एक नाटक तैयार किया गया संयोग से मुझे हिम्मत सिंह सिपाही का किरदार निभाने को दिया गया ।
नाटक की कहानी कुछ इस तरह से थी हमारे देश के क्रांतिकारियों जैसे (राजगुरु,सरदार भगत सिंह,सुखदेव) आदि को रतना दीदी छिप छिप कर पढाया करती थी एक दिन बिल्सन अंग्रेज को यह पता चल गया अंग्रेज कभी यह बर्दाश्त नहीं कर सकते थे इन क्रांतिकारियों को कोई पढाए इस बात के पता चलते ही विल्सन ने हिम्मत सिंह सिपाही को आदेश दिया कि तुम जाओ रतना को पकड़ कर लाओ बात क्या थी यह हिम्मत सिंह को पता नहीं थी हिम्मत सिंह एक अधिकारी के आदेश पर जाता है और रतना को पकड़ कर ले आता है लेकिन बिल्सन अंग्रेज ने जैसे ही हिम्मत सिंह के सामने रतना को पकड़ कर बेइज्जत करने लगता है यह देख कर हिम्मत सिंह का खून खौल जाता है और बह बिल्सन अंग्रेज को रोकने की कोशिश करता है पहले तो बहुत कहा सुनी होती है बाद में एक दूसरा सिपाही अंग्रेजों के कहने पर हिम्मत सिंह को गोली मार देता है और हिम्मत सिंह बड़ी फुर्ती से बिल्सन अंग्रेज को गोली मार देता बिल्सन अंग्रेज और हिम्मत सिंह सिपाही दोनों बहां मारे जाते हैं । नाटक अंत हो जाता है । मुझे आज भी अपने उस किरदार के साथ पूरी कहानी याद है ।
जय हिंद जय भारत बंदे मातरम्
सादर
पंडित सुशील कुमार पाठक
सरबराकार
श्री शिरडी साई सेवा ट्रस्ट रजिस्टर्ड बरेली